आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार // Home remedies for arthritis

  संधिवात रोग में शरीर के जोडों और अन्य भागों में सूजन आ जाती है और रोगी दर्द से परेशान रहता है। चलने फ़िरने में तकलीफ़ होती है।यह रोग शरीर के तंतुओं में विकार पैदा करता है,प्रतिरक्छा प्रणाली कमजोर हो जाती है,जोड शोथ युक्त हो जाते हैं,हिलने डुलने में कष्ट होता है।कलाई,घुटनों और ऊंगली ,अंगूठे में संधिवात का रोग ज्यादा देखने में आता है। कभी-कभी बुखार आ जाता है।भूख नहीं लगना भी इस रोग का लक्षण है। समय पर ईलाज नहीं करने पर आंखों,फ़ेफ़डों,हृदय व अन्य अंग दुष्प्रभावित होने लगते हैं।

संधिवात के कारण

१)आनुवांशिक कारण
२)खान-पान की असावधानियां
३) जोडों पर ज्यादा शारीरिक दवाब पडना
४) जोडों का कम या जरूरत से अधिक उपयोग करना
५) स्नायविक तंतुओं में विकार आ जाना और मेटाबोलिस्म में व्यवधान पड जाना।
६) सर्द वातावरण में शरीर रखने का कुप्रभाव
७)बुढापा और हार्मोन का असुंतुलन

संधिवात रोगी क्या करें और क्या न करें-

१) सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि रोगी २४ घंटे में मौसम के अनुसार ४ से ६ लिटर पानी पीने की आदत डालें। शरीर के जोडों में यूरिक एसीड जमा हो जाता है और इसी से संधिवात रोग जन्म लेता है। ज्यादा पानी पीने से ज्यादा पेशाब होगा और यूरिक एसीड बाहर निकलता रहेगा।

२) फ़ल और हरी सब्जीयां अपने आहार में प्रचुरता से शामिल करें।इनमें भरपूर एन्टीओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो हमारे इम्युन सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं।रोजाना ७५० ग्राम फ़ल या सब्जियां या दोनों मिलाकर उपयोग करते रहें।इनका रस निकालकर पियेंगे तो भी वही लाभ प्राप्त होगा।

३)ताजा गाजर का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिश्रण कर १५ मिलि प्रतिदिन लें।

 

४) ककडी का रस पीना भी संधिवात में लाभकारी है।

५) संधिवात रोगी को चाहिये कि सर्दी के मौसम में धूप में बैठे।

७) चाय,काफ़ी,मांस से संधिवात रोग उग्र होता है इसलिये जल्दी ठीक होना हो तो इन चीजों का इस्तेमाल न करें।

६) शकर का उपयोग हानिकारक होता है।

८) तला हुआ भोजन,नमक,शकर तेज मिर्च-मसाले,शराब छोडेंगे तो जल्दी ठीक होने के आसार बनेगे

 

९) संधिवात रोगी के लिये यह जरूरी है कि हफ़्ते में दो दिन का उपवास करें।

१०) काड लिवर आईल ५ मिलि की मात्रा में सुबह शाम लेने से संधिवात में फ़ोरन लाभ मिलता है।

११) पर्याप्त मात्रा में केल्शियम और विटामिन डी की खुराकें लेते रहें। ये विटामिन भोजन के माध्यम से लेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा।

१२) तीन नींबू का रस और ४० ग्राम एप्सम साल्ट आधा लिटर गरम पानी में मिश्रित कर बोतल में भर लें। दवा तैयार है। ५ मिलि दवा सुबह शाम पीयें। यह नुस्खा बेहद कारगर है।

१३) मैने साईटिका रोग में आलू का रस पीने का ईलाज बताया है। संधिवात में भी आलू का रस अशातीत लाभकारी है। २०० मिलि रस रोज पीना चाहिये।

१४) ज्यादा सीढियां चढना हानिकारक है।

१५)अपने काम और विश्राम के बीच संतुलन बनाये रखना जरूरी है।

१६) अदरक का रस पीना संधिवात के दर्द में शीघ्र राहत पहुंचाता है।

१७) अलसी के बीज मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें। २० ग्राम सुबह और २० ग्राम शाम को पानीके साथ लें। इसमे ओमेगा फ़ेट्टी एसीड होता है जो इस रोग में अत्यंत हितकर माना गया है।इससे कब्ज का भी निवारण हो जाता है।

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हर्बल चिकित्सा के अनमोल  रत्न-


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र – बाधा  का  अचूक  इलाज *किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

विशिष्ट परामर्श-  

    संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी – बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| हर्बलऔषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|








 

 

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