जीरा घटाता है वजन //Cumin reduces weight


जीरा खाने को बेहतरीन स्वाद और खुशबू देने वाला मसाला है| यह केवल एक मसाला मात्र नहीं है बल्कि इसके अन्य कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं| आयुर्वेद में कई रोगों में में इसका उपयोग किया जाता है| भारत ,मेक्सिको और अमेरिका में जीरे का बहुतायत से उपयोग किया जाता है|

मैं अब जीरे से वजन कैसे कम किया जा सकता है ,इस पर लिखना चाहूँगा| एक ताजा मेडिकल स्टडी में पता चला है कि जीरा पावडर मोटापा कम करने में मदद गार है| बात ये है कि जीरा से शरीर में वसा का अवशोषण कम होता है| फल स्वरूप मोटापा घटाने में सहायक है|

थकान दूर करने के उपाय

   

एक बड़ा चम्मच जीरा एक गिलास पानी में डालकर रात भर के लिए रख दें| सुबह इसे उबाल लें और गरम गरम चाय की तरह पियें| बचा हुआ जीरा भी चबा कर खालें|

इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर के किसी भी कौने की चर्बी घुलकर बाहर निकल जाती है| यह प्रक्रिया करने के बाद एक घंटे तक कुछ ना खाएँ|दूसरी विधि ये है कि भूनी हुई हींग ,काला नमक और जीरा बराबर  मात्रा में लेकर  चूर्ण बनालें|  मात्रा १ से ३ ग्राम, दही के साथ दिन में दो बार सेवन करने से  शरीर की अनावश्यक चर्बी  दूर  होती है|  साथ ही रक्त परिसंचरण  भी सुधरता है और शरीर का कोलेस्ट्रोल भी घटता  है|

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

यह नुस्खा लेने के बाद रात्री में कोई दूसरी भोजन सामग्री ना खाएं| धूम्र पान करने वाले और मसाला गुटखा खाने वालों पर इस नुस्खे का प्रभाव न के बराबर होता है| इसलिए दवा से लाभ प्राप्त करने के लिए धूम्र पान ,गुटखा, तम्बाखू त्याग दें| | दवा शाम के भोजन के दो घंटे बाद लेना कर्तव्य है| जीरा हमारे पाचन तंत्र को चुस्त दुरुस्त रखते हुए शरीर को उर्जावान बनाता है| जीरा हमारे इम्यून सिस्टम को ताकत देता है| फेट बर्न की गति तेज करता है| पेट की लगभग सभी समस्याओं में जीरे का प्रयोग हितकारी होता है| जीरे से शरीर की शोधन प्रक्रिया बलवान होती है |यह न केवल मोटापा घटाता है बल्कि कई अन्य बीमारियों में भी हितकारी है|

 

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सब्जियों से करें डायबिटीज़ कंट्रोल // Just vegetables to control diabetes

मधुमेह एक ऐसा भयंकर रोग हैं जिसमे कुछ भी खाना पीना हो तो बहुत सोचना पड़ता हैं के क्या खाये और क्या न खाये ऐसे में कुछ ऐसी सब्जियां हैं जिनका खानपान मधुमेह के हिसाब से सही तो हैं ही बल्कि इनके सेवन से मधुमेह के रोग को कंट्रोल करने में बहुत मदद मिलती हैं अपने भोजन में इन्हे जरूर शामिल करें |

आइये जाने इन सब्जियों के बारे में जो मधुमेह का नियंत्रण  करती हैं

हरी फली-

आपने ग्रीन बींस की सब्जी बनाकर खाई होगी। यह स्वादिष्ट तो होती है साथ ही गुणकारी भी होती है। इसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए, फोलेट और मैग्नीशियम पाए जाते हैं। आपको बता दें ग्रीन बींस एक ऐसी सब्जी है जिसका आप यदि नियमित रूप से सेवन करते हैं तो आपका वजन घट सकता है, क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो वजन को घटाने में सहायक है। यह इम्यून सिस्टम को बेहतर करता है साथ ही हड्डियों को भी मजबूती प्रदान करता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए आदर्श सब्जी माने जाने वाली हरी फली दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए फायदेमंद है और पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

करेला-

करेला अग्नाशय को उत्तेजित कर इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाता हैं करेले में इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में होती हैं यह इंसुलिन मूत्र एवं रक्त दोनों की ही शर्करा को नियंत्रित करने में समर्थ हैं मधुमेह  में करेले का जूस और सब्जी दोनों ही लाभदायक हैं और इसका चूर्ण भी  हितकारी है|


किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 


सेम –

सेम में इंसुलिन पाया जाता हैं और इसमें रेशा अर्थार्थ फाइबर भी अधिक होता हैं जो मधुमेह में बहुत लाभदायक हैं मधुमेह के रोगी को सेम की सब्जी और कच्ची सेम का जूस पीना चाहिए ये जूस नित्य एक-एक कप दिन मे दो बार पीना चाहिए

गाजर-

औषधीय गुणों से भरपूर गाजर का सेवन बहुत ही लाभकारी है। चिकित्सकों के मुताबिक इसे कच्चा खाने या इसका जूस पीने से न केवल आपकी आंखों को फायदा होता है बल्कि पेशाब और कफ संबंधी समस्या के लिए भी यह उपयोगी है। मधुमेह के मरीजों को यकीनी तौर  पर गाजर का सेवन करना चाहिए। जो लोग रोजाना गाजर खाते हैं तो उनका इंसुलिन नियंत्रित रहती है। गाजर एक वीर्य वर्धक सब्जी है और इसे कच्चा तथा उबालकर सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है।

सिर्फ सब्जियों से डायबिटीज़ कंट्रोल  करें –

शलगम की सब्जी भी मधुमेह में बहुत लाभदायक हैं इसको भी मधुमेह के रोगी को अपने भोजन में जगह देनी चाहिए


गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज



पत्ता गोभी-

आज खुद को स्वस्थ्य रखने के लिए लोग हरी सब्जियों का अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा शामिल कर रहे हैं। पत्ता गोभी उनमें से एक है। अधिकांश घरों में सेवन किया जाने वाला पत्ता गोभी स्वास्थ्य के लिए एक गुणकारी सब्जी है। इसे लोग सब्जी और पकौड़े के रूप में खाते हैं। इसके अलावा इसका इस्तेमाल सलाद के रूप में भी किया जाता है। फायबर, बिटा केरोटिन, विटामिंस बी1, बी6, के, ई, सी से भरपूर पत्ता गोभी न केवल त्वचा और बालों के लिए बहुत ही उपयोगी है बल्कि इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स डायबिटीज में दवा की तरह काम करते हैं।

कद्दू –

कद्दू में विटामिन सी ,आयरन और वसा ,एंटी आक्सिडेंट और फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं कद्दू का सेवन करने से मधुमेह के रोगियों को बहुत फायदा होता हैं और इस रोग की रोकथाम करने में बहुत मदद मिलती हैं

टमाटर- 

मधुमेह में टमाटर बहुत ही लाभदायक हैं टमाटर की खटाई शरीर में शर्करा की मात्रा को कम करती हैं मूत्र में शक़्कर जाना धीरे-धीरे बंद हो जाती हैं

ब्रोकोली-

ब्रोकोली एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर की एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्रोत है जिसे कैंसर के रोगियों के लिए सही माना गया है। यह हरी सब्जी ब्रेसिक्को फेमिली की है, जिसमें पत्तागोभी और गोभी भी शामिल होती है। आयरन, प्रोटीन, कैल्शिभयम, कार्बोहाइड्रेट, क्रोमियम, विटामिन ए और सी से भरपूर ब्रोकोली मधुमेह के रोगियों के लिए भी सही माना जाता है। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है बल्की रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है। इसके साथ ही यह वजन को भी कम करता है। इसलिए अपने डाइट में ब्रोकोली को शामिल करें।


गठिया रोग के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार


खीरा-

कार्बोहाइड्रेट, वसा, आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर खीरा पीलिया, प्यास, कब्ज की समस्या, ज्वर, शरीर की जलन, गर्मी के सारे दोष, चर्म रोग में लाभदायक है। पौष्टिक और शक्तिवर्धक होने की वजह से खीरा मस्तिष्क के लिए गुणकारी है। इसके अलावा जो लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित है उन्हें में भी खीरा खाना चाहिए।

लौकी-

मधुमेह में लौकी बहुत ही लाभ करती हैं सब्जी सलाद के रूप में कच्ची लौकी खा सकते हैं सुबह खली पेट लौकी का रस पीना मधुमेह में बहुत लाभदायक हैं लौकी के रस में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर पिए|


 

हर्बल इलाज के दोहे //Dohe of herbal remedy

* शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम, 

बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..


*दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, 

होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

*ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल, 

नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..


*बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल, 

यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

*अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय, 

चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

* अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय, 

फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

.

*अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग, 

नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

*रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर

बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..

*गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम, 

रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

*

*चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय, 

चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

*लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,

जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

*प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह , 

जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

*सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, 

दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

*सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार, 

दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

*तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल, 

सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

* थोड़ा सा गुड़ लीजिए,दूर रहें सब रोग, 

अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.



बवासीर  के  रामबाण  उपचार 

 

*अजवाइन और हींग लें,लहसुन तेल पकाय, 

मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

*ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,

उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..

*दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,

दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..

* मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,

बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

*कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,

घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

*बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,

सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

मोतियाबिंद के  घरेलू प्राकृतिक उपचार 

*बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,

सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

*नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,

चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

*मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,

कंठ सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय.

*पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,

नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

* ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,

नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

*कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,

अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

*अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,

कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

*छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,

जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

सहजन से करें कई रोगों का रामबाण इलाज

सहजन या मुनगा जड़ से लेकर फूल-पत्तियों तक सेहत का खजाना है। इसके ताजे फूल से हर्बल टॉनिक बनाया जाता है और इसकी पट्टी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत में खासकर दक्षिण भारत में इसका उपयोग विभिन्न व्यंजनो में खूब किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जाता है और इसकी छाल पत्ती गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है।

१) . सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया आदि में उपयोगी है।
२) सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका ,गठिया,,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।
३) . सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है 


*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*


४) . सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है\ साईं टिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है .
५) सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।
६) सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।
७) सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व् वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।
८) सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। 


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


९) .सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।
१०) . सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
११) . सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।
१२) सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से

उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।
१३) सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।
१४) . सहजन. की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।
१५) . सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है। 


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*


१६) सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
१७) . सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।
१८) सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है .

पैरों के दर्द के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

हम में से जादातर लोगो को कभी न कभी पैर में दर्द की शिकायत होती है कभी अचानक तो कभी रुक-रुक कर पैर में दर्द होने लगता है। पैर में दर्द के कई कारण हो सकते हैं, मसलन मांसपेशियों में सिकुड़न, मसल्स की थकान, ज्यादा वॉक करना, एक्सरसाइज, स्ट्रेस, ब्लड क्लॉटिंग की वजह से बनी गांठ, घुटनों, हिप्स व पैरों में सही ब्लड सर्कुलेशन न होना, पानी की कमी, खाने में कैल्शियम व पोटेशियम जैसे मिनरल्स और विटामिंस की कमी, किसी प्रकार की गहरी चोट होना, किसी प्रकार का संक्रमण या बीमारी होने के कारण आदि। कई बार शरीर की हड्डियां कमजोर होने से भी पैरों में दर्द की शिकायत हो जाती है।
हमारे पैर हड्डियों, लिगामेंट्स, टेंडन्स (ligament, tendons) और मांसपेशियों से बने होते हैं। इन चारो का सही से काम न करना पैर में दर्द का कारण बनता है जब भी हम खड़े होते है या चलते है तो हमारे पैरों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से पैर में दर्द होना आम बात है।

पैर के एक या एक से अधिक हिस्सों में होने वाले किसी भी दर्द या परेशानी को पैर दर्द कहा जाता है। पैर के इन हिस्सों में निम्न शामिल हो सकते हैं –
पैर की उंगलियाँ में दर्द
एड़ियां में दर्द
आर्च तलवे की एड़ी और पंजे के बीच के भाग ने दर्द
तलवे में दर्द आदि
यह दर्द कम और जादा भी हो सकता है। जादातर पैरों का दर्द जल्दी ठीक हो जाता है, परन्तु कभी-कभी यह समस्या लम्बे समय तक रह सकती है।
*अगर आपका दर्द लम्बे समय से है और किसी भी तरीके से आराम नहीं लग रहा है तो आपको डॉक्टर से पैर दर्द की जांच करनी चाहिए, खासकर जब यह किसी चोट के कारण शुरू होता है। कई बार चोट का असर बाहर नहीं दीखता है पर अंदरूनी मांशपेशियो पर इस चोट का असर होता है जो बाद में दर्द का कारण बनता है
इंसान के पैर में कुल 26 हड्डियां होती हैं। इसमें से एड़ी की हड्डी (कैलकेनियस) सबसे बड़ी होती है। इंसान की एड़ी की हड्डी को कुदरती रूप से शरीर का वजन उठाने और संतुलन के उद्देश्‍य से तैयार किया गया है। जब हम पैदल चलते या दौड़ते हैं तो यह उस दबाव को झेलती है जो पैर के जमीन पर पड़ने के बाद उत्‍पन्‍न होता है। और इसके साथ ही यह हमें अगले कदम की ओर धकेलती भी है। आइये जानते है पैर में दर्द से बचने के कुछ आसान उपायों के बारे में-

*हॉट एंड कोल्‍ड वॉटर थेरेपी -पैर में दर्द के इलाज के लिए एक कारगर तरीका है। गर्म पानी ट्रीटमेंट ब्‍लड फ्लों को बढ़ावा देने और ठंडा पानी से ट्रीटमेंट सूजन को कम करने में मदद करता है। दो पानी की बाल्‍टी लें एक में ठंडा पानी और दूसरें में सहने करने योग्‍य गर्म पानी डालें। अपने पैरों को तीन मिनट गर्म पानी की बाल्‍टी में डालें और तीन मिनट के बाद अपने पैरों को 10 सेकंड के लिए ठंडे पानी की बाल्‍टी में डालें। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराये। लेकिन ध्‍यान रहें कि आप गर्म पानी से शुरूआत और ठंडे पानी पर समाप्‍त करें। आप पैरों में दर्द को कम करने के लिए 10 मिनट के लिए बारी-बारी गर्म और ठंडा पैक भी लगा सकते हैं।
*सेंधा नमक एक और प्रभावी घरेलू उपाय है, जो पैरों के दर्द से तत्‍काल राहत प्रदान करने में मदद करता है। गर्म पानी के एक टब में 2-3 बड़े चम्‍मच सेंधा नमक के मिलाकर, इसमें अपने पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए डालें। फिर अपने पैरों को ड्राईनेस से बचाने के लिए उनपर मॉश्‍चराइजर लगाये।
लौंग का तेल सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, एथलीट फुट, नेल फंगस और पैरों के दर्द को दूर करने वाला एक अद्भुत तेल है। तुरंत राहत पाने के लिए लौंग के तेल का इस्‍तेमाल पैरों में धीरे-धीरे मालिश करने के लिए करें। मसाज रक्‍त के प्रवाह को उत्‍तेजित करता है और मांसपेशियों को आराम देता है। पैरों में दर्द की समस्या से जल्‍द राहत पाने के लिए एक दिन में कई बार मालिश करें।
*सरसों के बीज का इस्‍तेमाल शरीर से विषाक्त पानी निकालने, रक्त परिसंचरण में सुधार करने और सूजन को कम करके पैर में दर्द के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ सरसों के बीज लेकर, पीस लें और फिर इन्‍हें गर्म पानी की एक बाल्टी में मिलाये। अपने पैरों को इस पानी में 10 से 15 मिनट के लिए डालें।
*अगर आपको दबाव, मोच या चोट के कारण पैरों में दर्द का अनुभव हो रहा हैं, तो आप परेशानी से राहत पाने के लिए तेजपात का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा यह पैरों की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है। एक कप सेब के सिरके में एक मुट्ठी तेजपात मिलाकर कुछ मिनट के लिए उबाल लें। अब सूती कपड़े की मदद से दर्द वाले हिस्‍से पर लगाये। पैर में दर्द ठीक होने तक इस उपाय को दनि में कई बार दोहराये।
*अगर आपकी मांस-पेशियों में किसी तरह की तकलीफ है और वही दर्द की वजह है तो मसाज करना फायदेमंद रहेगा. आप चाहें तो मसाज करने के लिए ऑलिव ऑयल या नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. दिन में दो से तीन बार मसाज करना फायदेमंद होगा.
*पैर के दर्द से छुटकारा पाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है. हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाया जाता है. हल्दी में मिलने वाला करक्यूमिन नाम का यौगिक दर्द को कम करने में बहुत फायदेमंद होता है.

*अपनी एड़ी को आराम दें और उस पर ज्यादा वजन ना डालें।
किसी भी एथलीट एक्टिविटी से पहले स्‍ट्रेचिंग व्‍यायाम जरूर करें। क्योंकि आपके पैर का संतुलन बनाएं रखने के लिए जरूरी व्‍यायाम आपकी मदद कर सकते हैं।
*अच्‍छी क्‍वालिटी के जूते पहनें जो आपके खेल और पैरों के लिहाज से अनुकूल हों।
कई लोग पैर की एड़ी में दर्द होने पर भी तेजी से चलते या दौड़ते हैं। इसलिए अचानक तेज गति से न मुड़ें। अन्यथा स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
*दौड़, साइक्लिंग और स्‍वमिंग आदि से पैरों और टांगों को मजबूती प्रदान करने वाले व्‍यायाम करें। प्रभावित हिस्से को रगड़ से बचाने के लिए फुट पैड का उपयोग करें
*जिस पैर में दर्द हो रहा है, उसे थोड़ा ऊपर उठाकर रखें
*अपने पैर को जितना संभव हो, उतना आराम दें

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हर्बल चिकित्सा के अनमोल  रत्न-

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र – बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

 

लाजवंती (छुई मुई ) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

छुई मुई पौधे के घरेलु नुस्खे ( Home Remedies of Mimosa Plant )

छुई मुई का पौधा अपने आप में थोडा अजीब तरह का पौधा है साथ ही छुई मुई का दूसरा नाम लाजवंती भी है. इसके इन दोनों नामों के पीछे भी कारण है, जैसे ही हम इस पौधे को छूते हैं ये खुद को सिकोड़कर छोटे रूप में बदल जाता है. उस समय ऐसा प्रतीत होता है मानो ये हमसे शर्मा रहा होऔर यही कारण है कि इसका नाम लाजवंती पड़ा. छुई मुई का वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका भी है जबकि देसी नाम लजोली भी है. इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं, जो देखने में बहुत आकर्षक और सुन्दर प्रतीत होते हैं.
लाजवंती नमी वाले स्थानों में ज्यादा पायी जाती है इसके छोटे पौधे में अनेक शाखाएं होती है। इसका वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है। संपूर्ण भारत में होने वाला यह पौधा अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। इनके पत्ते को छूने पर ये सिकुड़ कर आपस में सट जाती है। इस कारण इसी लजौली नाम से जाना जाता है इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं । लाजवंती का पौधा एक विशेष पौधा है। इसके गुलाबी फूल बहुत सुन्दर लगते हैं और पत्ते तो छूते ही मुरझा जाते हैं। इसे छुईमुई भी कहते हैं।

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय* 

पेशाब की समस्यायें रखें दूर ( Removes Urinary Problem ) : यदि किसी को अधिक पेशाब आने की समस्या है तो छुई मुई के पत्तों को सबसे पहले पानी में पिस लें और एक लेप तैयार करें. अब इस लेप को नाभि के निचले हिस्से लगाएं, इससे बार बार पेशाब आने की समस्या में शीघ्र आराम मिलता है.

*लाजवंती के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। पत्तियों के रस की 4 चम्मच मात्रा दिन में एक बार लेने से भी फायदा होता है।

*लाजवंती की जड़ और पत्तों का पाउडर दूध में मिलाकर दो बार लेने से बवासीर और भगंदर रोग ठीक होता है। *पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लगाने से घाव जल्दी सुख जाता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है।

*लाजवंती की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त में जड़ों का पानी में तैयार काढ़ा भी खूनी दस्त रोकने में कारगर होता है।

*लाजवंती के पत्तों का 1 चम्मच पाउडर मक्खन के साथ मिलाकर भगंदर और बवासीर होने पर घाव पर रोज सुबह-शाम या दिन में 3 बार लगाने से ठीक हो जाता है |


गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज


*यदि लाजवंती की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बनाया जाए और इसे डायबिटीज रोगी को दिया जाए तो डायबिटीज में काफी फायदा होता है।

*खुनी दस्त में आराम ( Gives Relief from Bloody Diarrhea ) : 

यदि कोई खुनी दस्त सेग्रस्त है तो छुई मुई की जड़ों का चूर्ण बना लें, 3 ग्राम चूर्ण को दही के साथ खाने से खुनीदस्त जल्दी बंद हो जाता है.

लाजवंती की जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों के चूर्ण की 4 ग्राम मात्रा हर रात एक गिलास दूध के साथ एक माह तक लगातार ले।

 

मोतियाबिंद के  घरेलू प्राकृतिक उपचार 

*अगर diabetes है तो इसका 5 ग्राम पंचांग का पावडर सवेरे लें .

*पथरी किसी भी तरह की है तो , इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ .

*चर्म रोगों में राहत ( Cures Skin Diseases ) : 

आधुनिक विज्ञान ने भी ये माना है कि त्वचा संक्रमण हो जाने पर छुई मुई के रस को दिन में 3 बार त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है.

*पेशाब रुक – रुक कर आता है या कहीं पर भी सूजन या गाँठ है तो इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ

लाजवंती और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस लिया जाए और तैयार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के-हल्के मालिश किया जाए तो धीरे-धीरे ढीलापन दूर होता है।

लाजवंती के बीजों के चूर्ण (3 ग्राम) को दूध के साथ मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले लिया जाए तो शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।


काली मिर्च के फायदे


*स्तनों का ढीलापन दूर करे ( Removes Breasts Sagginess ) :

 

यदि स्त्रियों के स्तनों के ढीलेपन की समस्या है तो छुई मुई की जड़ों और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर अच्छे से मिलाकर पीस लें और पानी के साथ लेप बना लें. रोजाना दिन में दो बार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के – हल्के मालिश करें, स्तनों का ढीलापन दूर हो जायेगा.

*हड्डियों के टूटने और मांस-पेशियों के आंतरिक घावों के उपचार में लाजवंती की जड़ें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। घावों को जल्दी ठीक करने में इसकी जड़ें सक्रियता से कार्य करती हैं।

गले के रोग ( Treat Goiter ) :

 

 जिन्हें गोईटर की समस्या हो उनको छुई मुई की पत्तियों को पीसकर रोजाना दिन में दो बार लगाएं समस्या से तुरंत आराम मिलेगा.

*स्तन में गाँठ या कैंसर की सम्भावना हो तो , लाजवंती की जड़ और अश्वगंधा की जड़ घिसकर लगाएँ .

हड्डियों को मजबूती दे ( Strengthen Bones ) : छुई मुई हड्डियों के टूटने और मांसपेशियों के आंतरिक घावों को जल्द ही ठीक करता है.


स्वप्न दोष के  अचूक उपचार 


*अगर खांसी हो तो लाजवंती के जड़ के टुकड़ों के माला बना कर गले में पहन लो . हैरानी की बात है कि जड़ के टुकड़े त्वचा को छूते रहें ; बस इतने भर से गला ठीक हो जाता है . इसके अलावा इसकी जड़ घिसकर शहद में मिलाये . इसको चाटने से , या फिर वैसे ही इसकी जड़ चूसने से खांसी ठीक होती है . इसकी पत्तियां चबाने से भी गले में आराम आता है .

*टोंसील ( Tonsil ) : 

 

यदि किसी के टांसिल्स बढ़ गए हों तो छुई मुई की पत्तियों को पीसकर रोजाना दिन में दो बार लगाएं समस्या से तुरंत आराम मिलेगा.

*लाजवंती का मुख्य गुण संकोचन का है . इसलिए अगर कहीं भी मांस का ढीलापन है तो , इसकी जड़ का गाढ़ा सा काढा बनाकर वैसलीन में मिला लें और मालिश करें . anus बाहर आता है तो toilet के बाद मालिश करें .

uterus बाहर आता है तो, पत्तियां पीसकर रुई से उस स्थान को धोएँ .


*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*



नपुंसकता दूर करे ( Removes Impotency )

 

 नपुंसकता को दूर करने के लिए तीन से चार इलायची, छुई मुई की 2 ग्राम जड़, सेमल की 3 ग्राम छाल को आपस में अच्छे सेमिलकर कुचल लिया जाये और रोजाना एक गिलास दूध में मिलाकर रात को सोने से पहले पिया जाये तो आपको हो रही नपुंसकता को दूर किया जा सकता है.

*hydrocele की समस्या हो या सूजन हो तो पत्तोयों को उबालकर सेक करें या पत्तियां पीसकर लेप करें .

हृदय या kidney बढ़ गए हैं, उन्हें shrink करना है , तो इस पौधे को पूरा सुखाकर , इसके पाँचों अंगों ((फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़) ) का 5 ग्राम 400 ग्राम पानी में उबालें . जब रह जाए एक चोथाई, तो सवेरे खाली पेट पी लें .

*यदि bleeding हो रही है piles की या periods की या फिर दस्तों की , तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ पीसकर उसे दही में मिलाकर प्रात:काल ले लें ,या इसके पांच ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ.

किडनी रोगों से निवारण ( Removes Kidney Problems ) : 

 

किडनी में किसी तरह की समस्या होने पर आपको सबसे पहले इसका पूरा पौधा सुखाना है फिर इसके पाँचों अंगों को जोकि फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़ को 5 ग्राम की मात्रा में लेकर 400 ग्राम पानी मेंतब तक उबालें जब तक पानी ¼ ना रह जाये, अब इसे रोज सवेरे खली पेट पी लें, आपको निश्चित लाभ मिलेगा.
*Goitre की या tonsil की परेशानी हो तो , इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लेप करें .
*Uterus में कोई विकार है तो , इसके एक ग्राम बीज सवेरे खाली पेट लें
 .

रतनजोत के औषधीय प्रयोग,उपयोग,लाभ

रतनजोत पौधा

अंग्रेजी में इसे जेट्रोफा कहते है। रतनजोत से बायो डीजल बनता है जो कि पर्यावरण के लिए आशीर्वाद साबित हो सकता है। खासकर के भारत जैसे देश में जहां प्रदूषण का लेवल दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है ऐसे में इस पौधे की खेती करना अब अनिवार्य हो गया है। रहा है। यहीं वजह है कि रतनजोत की खेती बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इस पौधे का आयुर्वेद में भी महत्व बताया गया है। औषधी के रुप में ये कई रोगों को मिटाने में कारगर साबित हो रहा है।
बवासीर  के  रामबाण  उपचार

*रतनजोत का उपयोग बालों को काला करने के लिए किया जाता है | परन्तु इसका उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है | रतनजोत को और भी कई नामों से जाना जाता है | जैसे :- लालजड़ी और दामिनी बालछड | अंगेजी भाषा में इस पौधे को onosma भी कहा जाता है | रतनजोत अधिकतर हिमालय के भागों में पाया जाता है | इसका उपयोग आँखों की रौशनी और बालो को काला करने के लिए किया जाता है | तो आइए जानते है कि रतनजोत को कैसे बालों के लिए प्रयोग करें |

* सबसे पहले महंदी का पेस्ट बना लें | इसके बाद इस पेस्ट में रतनजोत मिला लें और गर्म कर लें | जब यह गर्म हो जाये तो ठंडा होने के लिए रख दें | जब यह ठंडा हो जाये तो इसे बालों में लगा लें और कम से कम 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें | इसके बाद पानी से सिर धो लें |

*जिस तेल का आप प्रयोग करते है | उस तेल में रतनजोत के थोड़े से टुकड़े डालकर अच्छी तरह से मिलाएं | इसके मिलाने से तेल का रंग सुंदर तो होता है | इस तेल को बालों में लगाने से बाल स्वस्थ और काले हो जाते है |

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

रतनजोत की जड़ के फायदे

  • * रतनजोत , एक किलोग्राम सरसों का तेल , मेंहदी के पत्ते , जलभांगर के पत्ते , और आम की गुठलियों को आपस में मिलाकर सरसों के तेल को छोडकर कूट लें | (लेकिन ध्यान रहे कि इन सभी पदार्थों की लगभग 100 – 100 ग्राम की मात्रा ही लेनी है | ) जब यह कूट जाये तो इसे निचोड़ लें | निचोड़ने के बाद इसे सरसों के तेल में इतना उबाल ले कि इसका पानी खत्म हो जाये और केवल तेल बचे | अब इस तेल को छानकर अलग कर लें | इस तरह से यह एक औषधि तैयार है | इस तेल को रोजाना सिर पर लगाने से बाल काले हो जाते है | इस तेल को लगाने के साथ ही साथ कम से कम 250 ग्राम दूध का सेवन करना चाहिए |यह उपचार बेहद कारगर है |वले को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चूर्ण में निम्बू का रस और रतनजोत मिलाकर के मिश्रण बनाएं | इस तैयार मिश्रण को बालों में लेप की तरह लगा लें | इस लेप को लगभग १५ से 20 मिनट तक रखें और सिर धो लें | ऐसा करने से बाल काले हो जाते है | आंवला और लौह चूर्ण को आपस में मिलाकर पानी के साथ पीस लें | इसे अपने बालो में लगा लें और कुछ समय बाद सिर धो लें | ऐसा करने से सफेद बाल काले हो जाते है |

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

बाल झड़ना बंद –

दही 100 ग्राम ,हल्दी पीसी हुई 10 ग्राम,  काली मिर्च पाँच  ग्राम  और रतनजोत 5  ग्राम  लें | अब इन सभी को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाएं | इस मिश्रण को सिर में कुछ देर तक लगाकर छोड़ दें और हल्के गर्म पानी से सिर धो लें | इस तरह के उपचार को एक सप्ताह में कम से कम एक बार करें | इससे आपके बालों का झड़ना बंद हो जायेगा और बाल स्वस्थ और काले हो जायेंगे |

स्किन की प्रोब्लम-

*पौधे की जड़ को पीसकर पावडर बना लें | इस पावडर को रोजाना सुबह और शाम लगभग आधे ग्राम की मात्रा में सेवन करें | इस उपचार को करने से स्किन की प्रोब्लम दूर हो जाती है |
हृदय रोग-

*· रतनजोत के पौधे की पत्तियों की चाय बनाकर पीने से दिल से जुडी हुई बीमारी नही होती |
गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

दाद , खुजली

* रतनजोत की ताज़ी पत्तियों का सेवन करने से खून का शुद्धिकरण होता है | इसके आलावा रतनजोत का उपयोग से स्किन पर होने वाले दाद , खुजली से छुटकारा मिल जाता है |

पथरी-

जिसे पथरी की समस्या है , उसे नियमित रूप से रतनजोत के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए | इस उपचार को करने से गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है |
डिप्रेशन –

* रतनजोत को थोडा सा घिस लें | इस घिसे हुए रतनजोत को अपने माथे पे लगायें | इस उपचार को करने से डिप्रेशन नही होता और मानसिक क्षमता बढती है |

*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

स्किन का रुखापन –

* रतनजोत को बारीक़ पीस लें | इसे तेल में डाल दें | इस तैयार तेल से अपने शरीर की मालिश करें | ऐसा करने से स्किन का रुखापन दूर हो जाता है |
रतनजोत के और भी अन्य उपाय निम्नलिखित है :-
·मिर्गी और दौरे –

* रतनजोत के पौधे की जड़ को पीसकर बारीक कर लें | जिन लोगों को मिर्गी या दौरे पड़ते हों ,उन्हें इस बारीक़ चूर्ण की एक ग्राम की मात्रा को सुबह के समय और शाम के समय खिलाएं | इस उपचार को लगातार करने से मिर्गी और दौरे की समस्या दूर हो जाती है |

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*इसके फूल और तने औषधीय गुणों के लिये जाने जाते हैं।
*इसकी पत्तियां घाव पर लपेटने (ड्रेसिंग) के काम आती हैं।
*इसके अलावा इससे चर्मरोगों की दवा, कैंसर, बाबासीर, ड्राप्सी, पक्षाघात, सर्पदंश, *मच्छर भगाने की दवा तथा अन्य अनेक दवायें बनती हैं।
*कब्ज या पेट से जूडी बिमारीयों के लिए रतनजोत का बीज वरदान है।
*इसके छाल और जड़ो से ‘डाई’ और मोम बनायी जा सकती है।

 

गुटखा खाने के नुकसान //Chewing food threats

लोग गुटका, पान मसाला, तंबाकू, धूम्रपान और इसी तरह की कितनी ही चीजों के आदी होते हैं। कुछ लोग तो ऐसी चीजों को खाने के लिए हरदम बेचैन रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करके आप बीमारियों को खुद बुलावा दे रहे हैं-क्या आप जानतें हैं पान मसाला, तंबाकू और गुटका आपके शरीर पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इतना ही नहीं इनका प्रभाव कई बार इतना खतरनाक होता है कि आपको कैंसर तक हो सकता है। सिर्फ बीमारियां ही नहीं, इनसे व्याक्ति का हार्मोंन संतुलन भी बिगड़ने लगता है और सेक्स हार्मोंस भी प्रभावित होते हैं|इस बार जब किसी गुटखे के पाउच की रंग-बिरंगी पैकिंग खोलकर अपने मुंह में डालें तो इस बात का भी ध्यान रखें कि इससे न केवल आपको मुंह का कैंसर हो सकता है, बल्कि इससे दांत भी खराब हो सकते हैं। इतना ही नहीं, गुटखे में मौजूद कई किस्म के रसायनों से हमारे डीएनए को भी नुकसान हो सकता है।
गुटका, तंबाकू और इसी तरह की अन्य चीजों से आपको मुंह के कैंसर का सबसे अधिक खतरा रहता है। इसके साथ ही आपकों मुंह की कई और समस्याएं भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं गुटका इत्यादि चीजों से आपके दांत भी खराब हो जाते हैं और आपको सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा भी रहता है।   आपको गुटका, तंबाकू, पान इत्यादि खाने से इसीलिए भी बचना चाहिए क्योंकि इनके निर्माण में कई तरह के रसायन और खुशबुदार कलर्स का इस्तेमाल होता है जिससे आपके हार्मोंस तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही आपके डीएनए को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।
   शोधों में ये बात साबित हो चुकी है कि गुटका व इसी तरह की अन्य चीजों के सेवन से शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि ये नए नहीं हैं क्योंकि पहले भी कई शोधों में तंबाकू और गुटके के नुकसान साबित हो चुके है। इसके साथ ही इनसे होने वाले दांतों के नुकसान भी साबित हो चुके है।

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  दुनियाभर के देशों में भारत के लोगों को मुंह का कैंसर व अन्य तरह के कैंसर का सबसे अधिक खतरा रहता है, इसका सबसे बड़ा कारण भारतीयों द्वारा गुटके का अधिक सेवन करना| दरअसल, गुटके में मिलाया जाने वाला तंबाकू, सुपारी, चूना, नशीले ,पदार्थ और कत्था इत्यादि से शरीर के एंजाइम्स पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे शरीर के हर हिस्से में पाए जाने वाले इन एंजाइम्स की कार्यशैली और कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।इसके अलावा हमारे सेक्स हार्मोन भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। हाल ही में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एज्यूकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि गुटखा खाने का बुरा असर हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर होता है। इससे पहले विभिन्न अध्ययनों में धुआंरहित तंबाकू उत्पाद गुटखा से दांतों के खराब होने पर ही सहमति थी।

 भारत में दुनिया के दूसरे देशों की अपेक्षा कैंसर होने के खतरे सबसे ज्यादा होते हैं। गुटखे में तंबाकू, कत्था, सुपारी, चूने के साथ और कई नशीले पदार्थों को मिलाया जाता है, जो हमारे शरीर के एंजाइमों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। हमारे शरीर के हर अंग में पाए जाने वाले साइप-450 नामक एंजाइम की कार्यक्षमता पर इसका बुरा असर पड़ता है। चंडीगढ़ में हुआ यह अध्ययन साइंस जर्नल ‘केमिकल रिसर्च इन टॉक्सीकोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है।
हमारे शरीर में ये एंजाइम हार्मोंस के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा गुटखा हमारे शरीर में टॉक्सिन बनने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाता है। जो हार्मोन टॉक्सीन बनाते हैं, यह उनको नुकसान पहुंचाता है। इस अध्ययन के लिए जानवरों को चुना गया था। पीजीआई चंडीगढ़ के डिपार्टमेंट ऑफ बायोफिजिक्स के मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. कृष्ण एल. खंडूजा के अनुसार गुटखे का आदमी और जानवर दोनों पर ही विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस अध्ययन के कई महत्वपूर्ण नतीजे सामने आए हैं। इससे यह पता चला है कि धुआंरहित तंबाकू से न केवल मुंह और दांत संबंधी समस्याएं होती हैं, बल्कि शरीर के कई अंगों जैसे फेफड़ों, लीवर, सेक्स और किडनी पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
चबाने वाली तंबाकू में कई किस्म के रसायन होते हैं, जो हमारे रक्त में मिलकर पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं। इससे पहले वैज्ञानिकों के पास धुआंरहित तंबाकू का शरीर के अन्य अंगों पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के विषय में ज्यादा ज्ञान नहीं था। इसी बात की जाँच करने के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने प्रयोगशाला में चूहों पर अपने प्रयोग किए और धुआंरहित तंबाकू यानी गुटखे के एंजाइम्स और जेनेटिक्स पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को जांचा गया।
हैलिस शेखसरिया इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ, मुंबई के डायरेक्टर डॉ. प्रकाश सी. गुप्ता के अनुसार इस शोध से यह संदेश मिलता है कि गुटखा मुंह संबंधी बीमारियों को बुलावा तो देता है, पर सेक्स हार्मोन पर इसका सबसे ज्यादा निगेटिव प्रभाव देखा गया है।
यहां तक कि अधिक मात्रा में लगातार सेवन से आदमी नपुंसक हो सकता है। साथ ही यदि गर्भवती महिलाएं लगातार गुटखे का सेवन करती हैं तो इससे उनके आने वाले बच्चे को कई किस्म की समस्याएं हो सकती हैं। गुटखा मौत का पैगाम लेकर आता है हम उसे सुनने में देर कर देते हैं।