वात रोगों की घरेलू आयुर्वेदिक चिकित्सा

वात रोग को दूर करने के उपाय

शरीर की अधिकतर बीमारियाँ बात असंतुलन के कारण पैदा होती हैं, बल्कि वात असंतुलन के बगैर पित्त और कफ भी असंतुलित नहीं हो सकते। जिस तरह से हवा के कारण बाहरी दुनिया में संचार संभव होता है, कुछ उसी तरह से वात के कारण ही शरीर के भीतर सभी तत्वों का आपस में जुडाव संभव होता है।
हवा की तरह ही वात का भी एक प्रमुख लक्षण है- गति। शरीर की सभी गतियों का संचालक वात ही है। शरीर के किसी अंग की गति में अवरोध हो तो समझना चाहिए कि वात असंतुलित हो रहा है। मसलन, हृदय का काम है रक्त संचार बनाए रखने के लिए धड़कते रहना। यदि हृदय की धड़कन में गड़बड़ी आ जाए तो इसका अर्थ है कि वात बढ़ रहा है। यदि कोई व्यक्ति चाहकर भी शांत नहीं रह सकता तो समझिए कि वह बात असंतुलन का शिकार है। जिसे अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण नहीं है, वह वात रोगी होगा ही। इसी तरह शरीर की गतियों से संबंधित लकवा, पाकिंसन, अकड़न जैसे रोग बढ़े हुए वात के ही परिणाम हैं। यही कारण है कि सभी तरह की मानसिक व्याधियों में बिगड़े हुए वात का हाथ भी कुछ-न-कुछ जरूर दिखाई देता है। वात रोग में मुख्यतः जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना, खुश्की तथा रूखापन, शरीर में जकड़न तथा दर्द, सिर में भारीपन, पेट फूलने, गठिया, लकवा आदि शरीरिक कठिनाई आती है आज हम आपको वात रोग निवारण के लिए बहुत ही सरल और उपयोगी घरेलु उपचार बता रहे हैं
वात रोग निवारण के उपाय
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, जावित्री आधा चम्मच को ग्वारपाठा के 10 ग्राम गूदे के साथ खाने से वात रोग 2 महीनो में ठीक हो जाता है।
*दानामेथी 2 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच को मिलाकर पीने से सभी वात रोग ठीक हो जाते हैं।
*गेहूँ की रोटी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर प्रात:काल 1 बासी रोटी बिना चुपड़ी खाने से पेट की वायु एवं वात रोग शीघ्र शांत होने लगते हैं।
*वात रोग निवारण के लिए दानामेथी चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ 50 ग्राम, देशी घी 100 ग्राम तथा पीपल, काली मिर्च, धनिया, पीपरामूल, दालचीनी और नागरमोथा सबका चूर्ण 10-10 ग्राम लें। सभी चीजों को कूट-पीसकर 200 ग्राम ग्वारपाठा का गूदा लेकर मिलाकर गरम करें। अब इनको देशी घी में भून लें। ठण्डा हो जाने पर 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। रोजाना 1 लड्डू खाएँ तो शरीर में सूजन, वात रोग, वात विकार, पेट की गैस आदि रोग जड़ सहित मिट जाते हैं।
*10 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग तथा विकार शांत हो जाते हैं।
वात रोग की वजह से होने वाले गठिया और जोड़ो के दर्द का उपचार
*एलोवेरा के गूदे को गरम करके जोड़ों पर मालिश करने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*अजमोदादि चूर्ण को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ खाने से गठिया रोग 2 सप्ताह में चला जाता है।
एक गिलास पानी में 20 ग्राम आंवले को उबालकर उसमें एलोवेरा का 10 ग्राम गूदा मिलाकर दिन मे 3-4 बार 4-4 चम्मच लें तो वात रोग के कारण होने वाली जोड़ों की सूजन मिट जाती है।
*पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर एलोवेरा का गूदा मिला लें। इस तैयार पानी को ठण्डा करके पीने से गठिया आदि रोग ठीक जाते हैं।
*4 नग बादाम को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ पीसकर गरम करके खाने से पक्षाघात वाले अंगों में शक्ति उत्पन्न हो जाती है।
*करेले का रस 2 चम्मच और एलोवेरा का रस आधा कप 10 दिनों तक सुबह शाम खाने से वात रोग के कारण होने वाला हड्डी दर्द ठीक हो जाता है।
*10 ग्राम गुग्गुल को एलोवेरा के रस के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिट जाता है।
*दानामेथी का चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा के रस के साथ सुबह-शाम लेने से जोड़ों की बीमारियाँ, घुटनों का दर्द मिट जाता है।
*खाने के साथ बच का चूर्ण 1 चम्मच प्रतिदिन एलोवेरा के ताजे रस के साथ सेवन करने से वात व्याधि, जोड़ों का दर्द, घुटनों की पीड़ा शांत हो जाती है।
वात रोग की वजह से होने वाले कमर दर्द का उपचार
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, तुलसी के बीजों का रस आधा चम्मच, एलोवेरा का रस 2 चम्मच मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से कमर सम्बन्धी रोगों में आराम होता है।
*सहिजन की फलियों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम मिलाकर लें तो कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
*राई 10 ग्राम, एलोवेरा का गूदा 50 ग्राम मिलाकर कमर पर गरम-गरम लेप करने से कमर दर्द एक बार में आधा चला जाता है।
*असगंध चूर्ण 1 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और एलोवेरा का गूदा 4 चम्मच मिलाकर खाने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क, चणक, नस का दर्द एवं सायटिका रोग मिट जाता है।
*अजवायन को एलोवेरा के गूदे में भरकर 2 सप्ताह तक धूप में सुखाकर रखें और इस तैयार चूर्ण में से 1 चम्मच को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ लें तो वात रोग के कारण होने वाले कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
वात रोग से होने वाली सूजन का उपचार
*शरीर में सूजन आ जाने पर मुलतानी या चिकनी मिट्टी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर लेप करें तो सूजन ठीक हो जाती है।
*त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा का रस चौथाई कप मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें तो वात रोग, वात विकार और लकवा शीघ्र ठीक हो जाते हैं।
*फिटकरी 1 चम्मच और एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम को हल्का गरम करके इसका लेप करें तो सूजन वाले अंग की सूजन मिट जाती है।*वात रोग या वात बिगड़ने से शरीर में सूजन आ जाने पर एलोवेरा का रस 2 चम्मच, हल्दी 1 चम्मच और चूना आधा चम्मच मिलाकर लेप करें तो लाभ हो जाता है।
*रात को सोते समय एलोवेरा के गूदे से तलवों पर मालिश करने से शरीर की वात संतुलित रहता है और पैरों का सुनपन भी ठीक हो जाता है।
लकवा पक्षाघात के लिए नुस्खे
*अंजीर 2 नग, एलोवेरा का रस 4 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और काली मिर्च चौथाई चम्मच मिलाकर खाने से 2 सप्ताह में लकवा ठीक हो जाता है।
*एलोवेरा का रस 50 ग्राम और तिल्ली का तेल 100 ग्राम मिलाकर उबाल लें एवं तेल तैयार होने पर मालिश करें तो वात रोग के कारण होने वाले लकवे में आराम मिलता है।
*लहसुन की 2-3 कलियाँ छिलकर एलोवेरा के गूदे के रस के साथ खाने से पक्षाघात 2 माह में ठीक हो जाता है।
*शहद 4 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच मिलाकर प्रात:काल बासी मुँह खाने से लकवा ठीक हो जाता है।
*1 चम्मच सर्पगंधा का चूर्ण को 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे के साथ सेवन करने से पक्षाघात ठीक हो जाता है तथा उच्च रक्तचाप शांत हो जाता है।
*चौलाई के पत्तों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 20 ग्राम और अदरक का रस 1 चम्मच मिलाकर गरम करके पीने से जोड़ों में मजबूती आती है एव दर्द मिट जाता है।
*एलोवेरा को पत्तों सहित उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवे वाले हिस्से की सिकाई करने से दो सप्ताह में अंगों में फड़कन, चलन शुरू हो जाती है।

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विशिष्ट परामर्श-
संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी – बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है|रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द रहित सक्रियता हासिल करते हैं |औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|

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5 विचार “वात रोगों की घरेलू आयुर्वेदिक चिकित्सा&rdquo पर;

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